सड़क पर नमाज गलत तो अन्य धार्मिक आयोजन सही कैसे? ओवैसी के तीखे सवाल
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज और अन्य धार्मिक गतिविधियों को लेकर हो रही बयानबाजी पर सरकार को घेरा है। ओवैसी ने देश में धार्मिक आयोजनों को लेकर ‘दोहरे मापदंड’ का आरोप लगाते हुए एक बड़ा संवैधानिक सवाल खड़ा किया है
हैदरबाद। आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य नेताओं द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर नमाज को लेकर दिए गए बयानों पर पलटवार किया।
ओवैसी ने संविधान के अनुच्छेद 25 (Article 25) का हवाला देते हुए कहा, “अगर सड़क पर नमाज पढ़ना गलत है, तो हर धर्म के त्योहार के मौके पर सड़कों पर निकलना और जुलूस निकालना भी गलत होना चाहिए। भारत में हर धर्म के त्योहार सड़कों पर ही मनाए जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों को केवल अजान और नमाज से ही दिक्कत होती है।”
‘रमजान में 30 दिनों के लिए बंद हों शराब की दुकानें’
ओवैसी ने मांस की दुकानों पर लगने वाले प्रतिबंधों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अक्सर किसी अन्य समुदाय के त्योहारों के दौरान मांस, अंडे और चिकन की दुकानों को बंद करा दिया जाता है।
ओवैसी ने चुनौती देते हुए कहा, “अगर आप कहते हैं कि किसी के त्योहार के दौरान मांस की दुकानें बंद होनी चाहिए, तो कानूनन समानता दिखाते हुए रमजान के पूरे 30 दिनों के लिए देश भर में शराब की दुकानें भी पूरी तरह बंद कर दी जानी चाहिए। आखिर यह किस तरह का दोहरा कानून है?”
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कांवड़ यात्रा और वीआईपी दौरों का दिया उदाहरण
सड़कों पर यातायात बाधित होने के तर्क का जवाब देते हुए हैदराबाद के सांसद ने उत्तराखंड से दिल्ली तक होने वाली धार्मिक यात्राओं का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन यात्राओं के दौरान हफ्तों तक सड़कें ब्लॉक रहती हैं, टेंट लगाए जाते हैं, लेकिन तब किसी को कोई आपत्ति नहीं होती।
उन्होंने पूछा कि हफ्ते में सिर्फ एक दिन (शुक्रवार को) या साल में दो बार ईद के मौके पर चंद मिनटों के लिए होने वाली नमाज से ट्रैफिक व्यवस्था कैसे खराब हो जाती है? उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर केवल मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने और उन्हें ‘दूसरे दर्जे का नागरिक’ साबित करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्य मुद्दे छिपाने के लिए उठाया जा रहा है नमाज का विवाद
अपने संबोधन में असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया और सरकार पर असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों पर इस समय नीट पेपर लीक से परेशान माता-पिता के दर्द, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और पश्चिम एशिया के तनाव के कारण बढ़ती ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों पर चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन उसकी जगह ‘अजान और नमाज’ का मुद्दा उठाकर देश का माहौल गरमाया जा रहा है।
ओवैसी ने स्पष्ट किया कि भारत जितना दूसरों का है, उतना ही मुसलमानों का भी है और वे अपने संवैधानिक व धार्मिक अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ना जारी रखेंगे।
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