पवन खेड़ा की वांगचुक से अपील: ‘जान जोखिम में न डालें’

पवन खेड़ा की वांगचुक से अपील: ‘जान जोखिम में न डालें’

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से अपनी जान जोखिम में न डालने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के प्रति पूरी तरह उदासीन है

 

नई दिल्ली:  जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से शुक्रवार को कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सोनम वांगचुक और उनके साथ अनशन कर रहे अन्य साथियों से अपनी जान जोखिम में न डालने की अपील की।

पवन खेड़ा ने बताया कि गुरुवार को कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि एक असंवेदनशील सरकार के सामने विरोध का तरीका ऐसा नहीं होना चाहिए, जिससे आंदोलनकारियों की जान पर बन आए।

कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि वे यही संदेश लेकर वांगचुक और उनके साथियों के पास आए हैं, क्योंकि यह ऐसी सरकार नहीं है जो लोकतांत्रिक विरोध को सुनती हो और उस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देती हो।

मुलाकात के बाद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना एक संवैधानिक अधिकार है। जब नागरिक अपनी बात रखने के लिए भूख हड़ताल करते हैं, तो सरकार का यह कर्तव्य है कि वह उनकी बात सुने, न कि उसे नजरअंदाज करे और यही राजधर्म है।

इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह की सरकारों का हवाला देते हुए खेड़ा ने कहा कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1984 में और डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 2011 में यही किया था। वे समझते थे कि असहमति होने के बावजूद सरकार की पहली ज़िम्मेदारी बातचीत करना है, लेकिन इस सरकार ने पूरी तरह चुप्पी साधने का रास्ता चुना है।

सरकार ने शिक्षा सुधारों की मांग पर बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है, चाहे यह मांग देश भर में राहुल गांधी और एनएसयूआई या युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उठाई हो, अथवा जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने। उन्होंने इस उदासीनता को सिर्फ अहंकार नहीं, बल्कि संवेदनहीनता करार देते हुए लोकतंत्र के लिए अनुचित बताया।

खेड़ा ने कांग्रेस की ओर से सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों से आग्रह किया कि वे अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए भूख हड़ताल खत्म करें, क्योंकि अपने लोगों को खोने से कोई आंदोलन मज़बूत नहीं होता, बल्कि आगे की लड़ाई के लिए जीवित रहना जरूरी है।

इसी आंदोलन के सिलसिले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के आंदोलन के मंच से देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में तत्काल सुधार की जरूरत पर जोर दिया।

केजरीवाल ने अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक का समर्थन करते हुए कहा कि वह अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि जब कोई छात्र किसी प्रतियोगी परीक्षा में बैठता है, तो वह सिर्फ परीक्षा देने नहीं जाता, बल्कि अपने सपनों को साकार करने की उम्मीद लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचता है।

छात्र को यह पूरा भरोसा होता है कि उसकी मेहनत, लगन और प्रतिभा के आधार पर उसका भविष्य तय होगा, लेकिन लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने युवाओं के इस अटूट विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है।

उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि वह खुद आईआईटी से पढ़े हैं और उनके बच्चों ने भी प्रतियोगी परीक्षाएं दी हैं, लेकिन उस दौर में इस तरह के पेपर लीक के मामले कभी सामने नहीं आते थे। आज की स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि बार-बार हो रहे पेपर लीक से देश के युवाओं का मनोबल टूट रहा है और पूरी शिक्षा व्यवस्था पर उनका भरोसा लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।


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Sanjana Kumari

संजना कुमारी: रियल-टाइम खबरों पर मजबूत पकड़ रखने वाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पत्रकार, जो सामाजिक-राजनीतिक, क्षेत्रीय और सांस्कृतिक घटनाक्रमों को डिजिटल दर्शकों के लिए सटीक व आकर्षक बनाती हैं