राम मंदिर चंदा विवाद: जयराम रमेश ने उठाई सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग

राम मंदिर चंदा विवाद: जयराम रमेश ने उठाई सुप्रीम कोर्ट जांच की मांग

नई दिल्ली: कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे और निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया कि नवंबर 2020 में ही एक प्राइवेट ऑडिट फर्म ने ट्रस्ट के कमजोर मैनेजमेंट, डेटा सुरक्षा की कमी और चंदे के हिसाब-किताब में बड़ी खामियों को लेकर आगाह किया था।

कांग्रेस का आरोप है कि इस मामले में बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के बजाय छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। इसी पारदर्शिता की कमी को देखते हुए विपक्ष ने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और पूरे घोटाले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस का आरोप है कि ऑडिट फर्म ने हर लेन-देन के लिए स्पष्ट नियम बनाने और सोने-चांदी जैसी कीमती भेंट का पूरा रिकॉर्ड रखने की सलाह दी थी, लेकिन इन सुझावों पर गंभीरता से अमल नहीं हुआ।

एसआईटी जांच का हवाला और सवाल

रमेश ने कहा कि जब शुरुआत में ही कमियों की जानकारी मिल गई थी, तो समय रहते सुधार क्यों नहीं किए गए? उन्होंने दावा किया कि 2026 में राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में भी चंदे की गिनती से जुड़ी गंभीर बातें सामने आईं।

उनके मुताबिक, गिनती कक्ष से 105 बार बिना अनुमति नकदी निकाले जाने की बात सामने आई। आरोप यह भी है कि कुछ कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के सामने खड़े होकर उनकी नजर रोकते थे। हालांकि, इन आरोपों और जांच के निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

यह विवाद केवल दान पेटियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर निर्माण के ठेकों में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, निर्माण परियोजना से जुड़े इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से शिकायत की थी कि ठेकों में 40 प्रतिशत तक कमीशन लिया जा रहा है।

इसके साथ ही मजदूरों के फर्जी नाम दर्ज करने और निर्माण सामग्री की दरें बढ़ाकर दिखाने का दावा भी किया गया। कांग्रेस का आरोप है कि जांच करने के बजाय शिकायतकर्ता इंजीनियर को ही पद से हटा दिया गया। हालांकि, इन सभी गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का रुख सामने आना अभी बाकी है।

कीमती दान की रसीद नहीं मिलने का दावा

जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि भक्तों की ओर से दी गई कई कीमती वस्तुओं को बिना आधिकारिक रसीद दिए स्वीकार किया गया।

कांग्रेस का सवाल है कि जब मंदिर को सोना, चांदी और दूसरी बहुमूल्य चीजें दान में मिलती हैं, तो उनका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता? रमेश ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर दान देने वाले लोगों को यह जानने का अधिकार है कि उनकी भेंट का हिसाब कैसे रखा जा रहा है। उन्होंने आरएसएस और भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आस्था से जुड़े इस मामले में जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता।

कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर के चंदे, जमीन के सौदों और निर्माण के ठेकों से जुड़े सभी आरोपों की सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि इस मामले में केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराकर मामला रफा-दफा नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

विपक्ष ने मांग की है कि साल 2020 से अब तक मंदिर को मिले दान, ऑडिट रिपोर्ट और निर्माण कार्यों के बदले किए गए भुगतानों का पूरा ब्योरा जनता के सामने रखा जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।


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Muskan Asif

मुस्कान आसिफ़ (ZH7TV) एक अनुभवी और रचनात्मक कंटेंट, डायनेमिक डिजिटल एडिटोरियल प्रोफेशनल पत्रकार हैं। जो बड़ी और असरदार खबरों का सटीक विश्लेषण करने में माहिर हैं। वे अपने नेटवर्क की पहुँच बढ़ाने के लिए बेहद आकर्षक वीडियो, टेक्स्ट और इंटरैक्टिव डिजिटल कंटेंट तैयार करती हैं।