संभल जामा मस्जिद विवाद: सर्वे के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने पूरी की सुनवाई, निर्णय सुरक्षित
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे वाले मामले में अपनी सुनवाई पूरी कर ली है और अब इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मस्जिद की देखरेख करने वाली इंतजामिया कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटया।
दरअसल, निचली अदालत ने मस्जिद परिसर का सर्वे कराने के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने का आदेश दिया था, जिस बाद में हाईकोर्ट ने भी सही माना था।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी: फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट ने संभल की जामा मस्जिद की प्रबंधन कमेटी की दो याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिनमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 19 मई 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें मस्जिद के सर्वे के दीवानी अदालत के निर्देश को बरकरार रखा गया था।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष मस्जिद समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी और अधिवक्ता निजाम पाशा पेश हुए, जबकि हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरि शंकर जैन और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पक्ष रखा।
एएसजी नटराज ने अदालत को बताया कि चूंकि मूल वाद ट्रायल कोर्ट में लंबित है, इसलिए राज्य सरकार विवाद के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती और उसका मुख्य दायित्व दोनों पक्षों के धार्मिक अधिकारों व हितों की रक्षा करना है, हालांकि उन्होंने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की धारा 2 और धारा 3 की व्याख्या पर जोर दिया, जो किसी भी पूजा स्थल के रूपांतरण पर रोक लगाती है।
अदालतों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश
उच्चतम न्यायालय ने 12 दिसंबर 2024 के अपने एक अहम आदेश में देश की अदालतों को धार्मिक स्थलों पर पुन: दावा जताने वाले नए मुकदमों पर विचार करने और पहले से चल रहे मामलों में कोई प्रभावी अंतरिम या अंतिम आदेश पारित करने से अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।
इसे भी पढ़ें: महाराष्ट्र: ठाणे में पेपर लीक के बाद 28 जून को होने वाली TET परीक्षा टली
यह पूरा विवाद 2024 में संभल के दीवानी न्यायाधीश के समक्ष दायर उस सिविल मुकदमे से शुरू हुआ था जिसमें दावा किया गया था कि मुगल शासक बाबर ने 1526 में हरिहर मंदिर को गिराकर यह मस्जिद बनवाई थी, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने 19 नवंबर 2024 को एकतरफा आदेश देकर एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया था।
इसी आदेश के खिलाफ और 24 नवंबर 2024 को हुए कथित गैर-कानूनी सर्वे को चुनौती देते हुए मस्जिद कमेटी ने उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था और अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आना बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 22 अगस्त को मस्जिद कमेटी की अपील को स्वीकार करते हुए इस कानूनी लड़ाई में सीधा हस्तक्षेप किया था। उस समय देश की सबसे बड़ी अदालत ने एक अंतरिम निर्देश जारी कर विवादित स्थल पर मौजूदा हालात को जस का तस बनाए रखने (यथास्थिति) का आदेश दिया था।
इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायलय ने संभल और चंदौसी की स्थानीय अदालतों में मस्जिद के सर्वे से जुडी सभी तरह की अदालती प्रक्रियाओ पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शासन को विशेष निर्देश दिया था कि वे इलाके में कानून-व्यवस्था मजबूत रखें और हर हाल में आपसी भाईचारा व् शांति बनाए रखें।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
