मोदी सरकार के जीडीपी ग्रोथ के दावों पर शरद पवार ने उठाये सवाल, सांख्यकीय तरीको में लगाया हेरफेर का आरोप
बारामती। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार ने केंद्र सरकार पर अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है।
बारामती में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित अप्रैल-जून तिमाही के 7.8 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ रेट के दावों पर सवाल खड़े किए। पवार ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छुपाने और मजबूत आर्थिक विकास का भ्रम पैदा करने के लिए सांख्यकीय तरीकों में हेरफेर कर रही है।
जमीनी हकीकत और असल समस्याओं को किया जा रहा पूरी तरह नजरअंदाज
शरद पवार ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वे देश के सामने एक ऐसा ‘गलत नैरेटिव’ पेश कर रहे हैं, जिससे यह लगे कि अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री अर्थव्यवस्था की स्थिति को जरूरत से ज्यादा अच्छा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे जमीनी हकीकत और असल समस्याओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि वे यह समझने में पूरी तरह नाकाम हैं कि देश की अर्थव्यवस्था असल में धीमी हो रही है।”
चीनी की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए शरद पवार ने कहा कि उत्पादन लागत बढ़ने के बावजूद किसानों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। उन्होंने चीनी के आयात के खिलाफ सलाह देते हुए कहा कि इसके असर के बारे में कुछ पक्का नहीं कहा जा सकता।
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शरद पवार ने कहा कि चीनी उत्पादन की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को इसका उचित आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने चीनी के आयात के खिलाफ भी स्पष्ट रूप से चेतावनी दी और कहा कि इसके अनिश्चित परिणामों से किसानों का हित प्रभावित हो सकता है। वहीं दूसरी तरफ शरद पवार ने उन्होंने महाराष्ट्र एफडीए (FDA) कमिश्नर तुकाराम मुंडे द्वारा डेयरी सेक्टर में मिलावट के खिलाफ चलाए गए सख्त अभियानों की सराहना की।
महाराष्ट्र में सूखा के संकट से किया आगाह
महाराष्ट्र के अंदरूनी हालात पर बात करते हुए शरद पवार ने राज्य में बारिश की भारी कमी के कारण पैदा होने वाले गंभीर संकट पर आगाह किया। उन्होंने कहा कि मानसून की बेरुखी से आने वाले दिनों में पीने के पानी और खरीफ सीजन की बुवाई के कार्यों को लेकर भारी संकट खड़ा हो सकता है, जिसके लिए सरकार और समाज को मिलकर सामूहिक राहत प्रयास करने होंगे।
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