शिवसेना ने सामना में दिया जवाब बीजेपी को बताया सत्ता परिवर्तन का इतिहास
नई दिल्ली: शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के जरिए भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया है कि देश में सत्ता परिवर्तन अब तय हो चूका है। पार्टी का कहना है कि राजनीतिक बदलाव एक अनिवार्य और संवैधानिक प्रक्रिया है जिसे कोई रोक नहीं सकता। सामना के संपादकीय में आरोप लगाया गया कि मौजूदा सरकार के पापों का घड़ा भर चुका है, यही वजह है कि वे ‘तिरंगा आंदोलन’ का विरोध कर रहे हैं।
शिवसेना के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज फहराने का विरोध करने वाले इस शासन को उखाड़ फेंकने के लिए देश की जनता ने अपना मन पूरी तरह बना लिया है जिससे इस बदलाव की रफ़्तार और तेज हो गई है।
दोहरे मापदंड का आरोप
संपादकीय में भारत के राजनीतिक इतिहास के उदाहरणों, जैसे आपातकाल के दौरान आंदोलनों और भाजपा के पूर्ववर्ती ‘जनसंघ’ का जनता पार्टी में विलय, वी.पी. सिंह द्वारा राजीव गांधी के खिलाफ बगावत को भाजपा के समर्थन और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ चलाए गए अभियानों का जिक्र करते हुए तर्क दिया गया कि भाजपा की इन सभी कोशिशों का मूल उद्देश्य भी ‘सत्ता परिवर्तन’ ही था।
सामना में लिखा गया है कि जब विपक्ष गलत तरीके से सत्ता में आई सरकार को बदलने की बात करता है तो उसे अराजकता बता दिया जाता है, जबकि खुद भाजपा के इतिहास में सत्ता बदलने के लिए इसी तरह के लोकतांत्रिक आंदोलन किए गए हैं, इसलिए अगर आज विपक्ष सत्ता परिवर्तन की वकालत कर रहा है तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
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शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में तर्क दिया है कि सत्ता के खिलाफ होने वाले विपक्षी आंदोलनों का असली मकसद हमेशा सरकार बदलना ही होता है, जो कि लोकतंत्र की एक स्वाभाविक पहचान है। सामना के संपादकीय में अंतरराष्ट्रीय उदाहरण देते हुए कहा गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान में तख्तापलट के लिए सैकड़ों बम गिराए और लगातार बयान दिए, लेकिन वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके।
मुखपत्र के अनुसार, सरकार में बदलाव की इच्छा रखना और उसके लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना किसी भी जीवित लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबी होती है, न कि कोई अपराध।
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