कुर्बानी नियमों पर सुवेंदु सरकार के नोटिफिकेशन के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची TMC
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अजहा (बकरीद) से ठीक पहले पशु वध नियमों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा मवेशियों की कुर्बानी पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान टीएमसी की दिग्गज नेता और सांसद महुआ मोइत्रा खुद कोर्ट में पेश हुईं और सरकार के इस फैसले का विरोध किया।
TMC ने कोर्ट में क्या दी दलील?
याचिकाकर्ता टीएमसी विधायक अखरुज्जमां और पार्टी की ओर से कोर्ट में पक्ष रख रहीं सांसद महुआ मोइत्रा ने डिविजन बेंच के सामने दलील दी कि राज्य सरकार का यह नोटिफिकेशन पशुपालकों और किसानों की कमर तोड़ देगा।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि बंगाल के लाखों लोग अपनी आजीविका के लिए पशुपालन पर निर्भर हैं और इस फैसले से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
टीएमसी ने कोर्ट से मांग की है कि पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम (West Bengal Animal Slaughter Control Act) के नियमों में ढील दी जाए और आगामी त्योहार को देखते हुए बैल, सांड और भैंसों की कुर्बानी की इजाजत दी जाए।
टीएमसी नेताओं का कहना है कि यह नोटिफिकेशन नागरिकों के खान-पान की स्वतंत्रता और धार्मिक रीतियों में सीधा दखल है।
सुवेंदु सरकार का नया नियम क्या है, जिससे मचा है बवाल?
हाल ही में पश्चिम बंगाल में 15 साल के ममता बनर्जी के शासन का अंत कर सत्ता में आई भाजपा सरकार ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बड़ा कदम उठाया है।
इसे भी पढ़ें: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर बवाल, कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग
सरकार ने साल 1950 के पुराने कानून और 2018 के कलकत्ता हाई कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए नया कड़ा नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
14 साल की उम्र का नियम:
अब गाय, बैल, बछड़े या भैंस जैसे बड़े पशुओं की कुर्बानी या वध तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक कि सरकारी पशु चिकित्सक (Veterinary Officer) और नगर पालिका के चेयरमैन या पंचायत समिति के अध्यक्ष संयुक्त रूप से लिखित में यह प्रमाणित न कर दें कि पशु की उम्र 14 वर्ष से अधिक है और वह काम या ब्रीडिंग के लायक नहीं बचा है।
खुले में वध पर पूर्ण प्रतिबंध:
सरकार ने खुले या सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। वध केवल चिन्हित और अधिकृत म्युनिसिपल बूचड़खानों (Slaughterhouses) में ही हो सकेगा।
जेल और जुर्माना: नियमों का उल्लंघन करने पर 6 महीने की जेल, 1,000 रुपये का जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही पुलिस को अवैध गोवंश तस्करी और बूचड़खानों पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
मुस्लिम संगठनों और इमामों ने की ‘शांति’ की अपील
इस पूरे विवाद और सरकार के कड़े रुख के बीच मुस्लिम समुदाय के कई बड़े धार्मिक नेताओं और संगठनों ने बेहद संतुलित बयान जारी किए हैं।
कोलकाता की ऐतिहासिक नाखौदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक काजमी और फुरफुरा शरीफ के पीरजादा ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे सामाजिक सौहार्द और कानून को ध्यान में रखते हुए इस बकरीद पर गाय की कुर्बानी देने से बचें और उसकी जगह बकरे या छोटे जानवरों की कुर्बानी दें।
कलकत्ता हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने टीएमसी की इस याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद अगली सुनवाई गुरुवार के लिए टाल दी है। अब देखना होगा कि अदालत इस संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गर्म मामले पर क्या रुख अपनाती है।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
