गहराई से समझिये: क्या है लोकसभा की सीटें 850 करने का सरकार का प्रस्ताव ?

गहराई से समझिये: क्या है लोकसभा की सीटें 850 करने का सरकार का प्रस्ताव ?

नई दिल्ली। लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव केवल संख्या बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र के ढांचे में एक बहुत बड़ा बदलाव है। सरकार ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

आइए इसे गहराई से समझते हैं:

अभी लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। नए प्रस्ताव के अनुसार राज्यों के लिए 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के लिए 35 सीटें होंगी

यह संख्या इसलिए बढ़ाई जा रही है ताकि महिला आरक्षण (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) को लागू किया जा सके। सरकार का तर्क है कि मौजूदा सीटों में कटौती किए बिना महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए कुल सीटों को बढ़ाना सबसे व्यावहारिक रास्ता है।

भारत में लोकसभा सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर जमी (Freeze) हुई है। सरकार अनुच्छेद 82 में संशोधन कर उस ‘प्रोविज़ो’ को हटाना चाहती है जो 2026 के बाद की जनगणना तक परिसीमन को रोकता है।

यह परिसीमन 2011 की जनगणना या हाल ही में शुरू हुई 2026-27 की जनगणना के आधार पर हो सकता है। सरकार ने “नवीनतम प्रकाशित जनगणना” शब्द का उपयोग करके लचीलापन रखा है।

यह इस प्रस्ताव का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। उत्तर भारतीय राज्यों (जैसे UP, बिहार) की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, जबकि दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल) ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतरीन काम किया है।

यहां यह भी समझना ज़रूरी है कि यदि सीटों का बंटवारा पूरी तरह जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो उत्तर भारत की सीटें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी और दक्षिण भारत का संसद में प्रभाव कम हो जाएगा। दक्षिण के नेता इसे “सजा” के रूप में देखते हैं।

सरकार का कहना है कि वे एक ऐसा फार्मूला लाएंगे जिससे किसी भी राज्य की मौजूदा सीटों का अनुपात कम न हो, बल्कि समग्र संख्या में 50% तक की वृद्धि की जाए।

2023 के कानून के अनुसार, महिला आरक्षण तभी लागू हो सकता था जब परिसीमन हो जाए। पुराने नियमों के हिसाब से यह 2034 से पहले संभव नहीं था। इस नए बिल का मुख्य उद्देश्य परिसीमन की प्रक्रिया को तेज करना है ताकि 2029 के लोकसभा चुनावों में ही महिलाओं को 33% (लगभग 273-280 सीटें) आरक्षण मिल सके।

महत्वपूर्ण बिंदु: सिर्फ लोकसभा ही नहीं, राज्यों की विधानसभा सीटों में भी इसी अनुपात में बढ़ोत्तरी होगी। महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें हर चुनाव के बाद बदलती (Rotate) रहेंगी।अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी 1/3 सीटें महिलाओं के लिए होंगी।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।