सहारनपुर मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन पर क्या बोलीं मायावती
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर में एक पुरानी मस्जिद पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर उसे गिरा दिया है, जिसके बाद से राजनीतिक काफी गरमा गई है, बताया जा रहा है कि यह मस्जिद करीब 150 साल पुरानी थी, जिसे अदालत का आदेश आने के बाद जमींदोज कर दिया गया।
इस कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पहले से ही नाराज थे, लेकिन अब बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी इस पर गहरा दुख और नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर चार अलग-अलग बातें लिखकर अपनी राय रखी है और सरकार से मांग की है कि इस तरह से धार्मिक स्थलों को गिराने के अभियानों पर तुरंत रोक लगाई जानी चाहिए।
मायावती ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर लिखा
मायावती ने अपने पोस्ट में लिखा कि सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को अवैध बताकर उन्हें जल्दबाजी में ध्वस्त करने का सरकारी अभियान सही नहीं है। एक संवैधानिक सेकुलर सरकार का यह दायित्व है कि वह सभी धर्मों और उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से आदर-सम्मान करे तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म में मस्जिदें नमाज पढ़ने का मुख्य और अभिन्न हिस्सा हैं, जिन्हें भारतीय परंपरा के अनुसार सम्मान देना व्यापक जनहित में जरूरी है।
बसपा प्रमुख ने बिना उचित नियम-कानून का पालन किए आरोपियों के मकानों को ध्वस्त करने और उनके परिवारों को सामूहिक रूप से बेघर करने की कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में केवल सरकार ही नहीं, बल्कि न्यायालय को भी उचित ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सभी पक्षों से सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने की अपील की है।
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उल्लेखनीय है कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित यह मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी हुई थी। डेढ़ साल तक चले कानूनी मुकदमे के बाद अदालत ने इसे अवैध करार दिया था, जिसके बाद शनिवार तड़के पुलिस और जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर इसे ध्वस्त कर दिया।
इस कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मामले को उच्च अदालतों में ले जाने की बात कही और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
दूसरी ओर, मस्जिद गिराए जाने की खबर मिलते ही कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सहारनपुर जाकर अधिकारियों से बात करने का फैसला किया, लेकिन पुलिस ने किसी भी तरह के हंगामे को टालने की लिए रात में ही उनके घर के बाहर पहरा लगा दिया और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया, इस बात पर इकरा हसन काफी भड़क गई।
उन्होंने सरकार और प्रशासन पर गुस्सा निकालते हुए सीधे सवाल किया कि क्या जनता की परेशानियों को लेकर बड़े अफसरों से मिलना अब कोई जुर्म हो गया है? उन्होंने साफ कहा कि वह जनता की नेता है और प्रशासन उन्हें घर में बंद करके या रास्ता रोककर आम लोगों की आवाज को बिल्कुल नहीं दबा सकता।
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