ट्रंप के सामने जिनपिंग ने उछाला ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का मुद्दा, टकराव के बजाय सहयोग का दिया प्रस्ताव
नई दिल्ली: बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई ऐतिहासिक बैठक ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसमें ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य पर गहन चर्चा हुई।
इस वार्ता के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक गंभीर चेतावनी देते हुए ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ (Thucydides Trap) नामक मुहावरे का जिक्र किया, जिसके वैश्विक राजनीति में गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।
जिनपिंग ने ट्रंप से सवाल किया कि क्या चीन और अमेरिका इस ऐतिहासिक जाल से ऊपर उठकर सहयोग और स्थिरता का एक नया मॉडल स्थापित कर सकते हैं, ताकि मानवता के भविष्य और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटा जा सके।
‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का सिद्धांत हार्वर्ड के राजनीति विज्ञानी ग्राहम एलिसन द्वारा लोकप्रिय बनाया गया है, जो प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के विश्लेषण पर आधारित है।
लगभग 2,500 साल पहले एथेंस के उदय और उससे स्पार्टा में पैदा हुए डर के कारण हुए पेलोपोनेसियन युद्ध के संदर्भ में यह सिद्धांत कहता हैबीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई।
ऐतिहासिक बैठक ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है, जिसमें ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दों और द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य पर गहन चर्चा हुई।
इस वार्ता के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक गंभीर चेतावनी देते हुए ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ (Thucydides Trap) नामक मुहावरे का जिक्र किया, जिसके वैश्विक राजनीति में गहरे मायने निकाले जा रहे हैं।
जिनपिंग ने ट्रंप से सवाल किया कि क्या चीन और अमेरिका इस ऐतिहासिक जाल से ऊपर उठकर सहयोग और स्थिरता का एक नया मॉडल स्थापित कर सकते हैं, ताकि मानवता के भविष्य और वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटा जा सके।
‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का सिद्धांत हार्वर्ड के राजनीति विज्ञानी ग्राहम एलिसन द्वारा लोकप्रिय बनाया गया है, जो प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के विश्लेषण पर आधारित है।
इसे भी पढ़ें: बाढ़ से हाहाकार, नेपाल में विदेशी एक्सपर्ट्स संभालेंगे कमान
लगभग 2,500 साल पहले एथेंस के उदय और उससे स्पार्टा में पैदा हुए डर के कारण हुए पेलोपोनेसियन युद्ध के संदर्भ में यह सिद्धांत कहता है। कि जब एक उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित सत्ता को चुनौती देती है, तो तनाव और टकराव की स्थिति अनिवार्य रूप से पैदा होती है, भले ही दोनों पक्ष युद्ध न चाहते हों।
वर्तमान परिदृश्य में, चीन का बढ़ता प्रभाव और अमेरिका द्वारा तकनीक व व्यापार पर लगाई जा रही पाबंदियां विशेषज्ञों को इसी ‘ट्रैप’ की याद दिला रही हैं।
पिछले तीन दशकों में चीन और अमेरिका के बीच की प्रतिस्पर्धा अब एक रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता में बदल चुकी है। टैरिफ युद्ध, निर्यात नियंत्रण, साइबर सुरक्षा, सप्लाई चेन की बाधाएं और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य तैनाती ने दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में ये रिश्ते और भी जटिल हो गए हैं, जिससे पूरी दुनिया इस बात को लेकर चिंतित है।
कि क्या ये दो दिग्गज आपसी टकराव को टालकर एक शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण कर पाएंगे या इतिहास खुद को दोहराएगा। कि जब एक उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित सत्ता को चुनौती देती है, तो तनाव और टकराव की स्थिति अनिवार्य रूप से पैदा होती है, भले ही दोनों पक्ष युद्ध न चाहते हों।
वर्तमान परिदृश्य में, चीन का बढ़ता प्रभाव और अमेरिका द्वारा तकनीक व व्यापार पर लगाई जा रही पाबंदियां विशेषज्ञों को इसी ‘ट्रैप’ की याद दिला रही हैं।
पिछले तीन दशकों में चीन और अमेरिका के बीच की प्रतिस्पर्धा अब एक रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता में बदल चुकी है। टैरिफ युद्ध, निर्यात नियंत्रण, साइबर सुरक्षा, सप्लाई चेन की बाधाएं और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सैन्य तैनाती ने दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल में ये रिश्ते और भी जटिल हो गए हैं, जिससे पूरी दुनिया इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या ये दो दिग्गज आपसी टकराव को टालकर एक शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण कर पाएंगे या इतिहास खुद को दोहराएगा।
Discover more from
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
