वोटर लिस्ट विवाद: ओवैसी बोले चुनाव आयोग बताए 2:1 के बहुमत का सच
नई दिल्ली: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के चुनाव और वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया पर गहरे सवाल उठाए है।
ओवेसी ने याद दिलाया कि संसद में कानून बनते समय ही उन्होंने सरकार को चेताया था कि आयोग के प्रमुख का चुनाव इसी मनमाने तरीके से हुआ, तो जनता का चुनाव आयोग पर से भरोसा उठ जाएगा। उनका आरोप है कि मौजूदा विवाद से उनकी यह आशंका सच साबित हो रही है।
वोटर लिस्ट या गुप्त एनआरसी
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा है कि कानून मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता को चयन प्रक्रिया में शामिल करने से 2:1 का अनुपात बन जाता है और आयोग को देश को स्पष्ट करना चाहिए कि उसके फैसले किस बहुमत के आधार पर लिए गए हैं, खासकर जब दो सदस्यों ने असहमति नोट दिए हों।
ओवैसी ने संसद में SIR को पीछे के रास्ते से एनआरसी लागू करने जैसा बताया था और कहा कि तेलंगाना में एनआरसी या स्थायी निवास प्रमाणपत्र जैसी प्रक्रियाएं नहीं हुई थीं।
उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा बिहार में समस्याओं का हवाला देकर परिवार रजिस्टर खारिज किए जाने का जिक्र करते हुए पूछा कि ऐसी स्थिति में ऑनलाइन प्रक्रिया, घर-घर जाकर नोटिस बांटने और दस्तावेज जुटाने जैसे काम एक साथ कैसे व्यावहारिक रूप से पूरे किए जा सकेंगे।
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असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा सरकार से कहा
ओवैसी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुख्य सवालों का जवाब देने में असमर्थ रहा है और एसआईआर के कारण देश के गरीब लोगों को दस्तावेजों की तलाश में भटकना पड़ रहा है, जिससे उनकी गरिमा प्रभावित हो रही है।
असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा सरकार से उन लोगो की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है जिनके नाम हालिया वोटर लिस्ट से गायब है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब माता-पिता या दादा-दादी के नाम ही सूचि में नहीं होंगे, तो उनके बच्चो और आने वाली पीढ़ी के नाम किस आधार पर जोड़े जाएंगे।
ओवैसी का कहना है कि सरकार की इस लापरवाही से भविष्य में युवा मतदाताओं को अपना वंश साबित करने और वोट देने का हक़ पाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
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