कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। राज्य में करीब 27 लाख मतदाताओं को पुनरीक्षण के बाद ‘अपात्र’ घोषित कर दिया गया था, जिसके खिलाफ बड़ी संख्या में लोगों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया था।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन लाखों अपीलों में से ट्रिब्यूनल ने अब तक केवल 500 अपीलों को ही सुनवाई के लिए मंजूर किया है। इससे भी अधिक हैरान करने वाली बात यह है कि गहन जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद केवल 137 लोगों को ही दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने और आगामी चुनावों में मतदान करने के योग्य पाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, जिन मतदाताओं की अपील 21 अप्रैल (पहले चरण के लिए) और 27 अप्रैल (दूसरे चरण के लिए) तक मंजूर होगी, केवल वही अनुपूरक सूची के माध्यम से वोट डाल सकेंगे। इस भारी अंतर ने बंगाल के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटे हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया पूरी तरह न्यायिक मानकों पर आधारित है और केवल वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने वालों को ही सूची में वापस जगह मिल रही है।
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"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।