इस बार यूपी में कांग्रेस को हल्के में लेना पड़ेगा भारी, नई रणनीति से चुनावी तैयारी में जुटी कांग्रेस

इस बार यूपी में कांग्रेस को हल्के में लेना पड़ेगा भारी, नई रणनीति से चुनावी तैयारी में जुटी कांग्रेस

ब्यूरो (राजाज़ैद)। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधान सभा चुनाव के लिए सभी अहम् दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। सीटों और गठबंधन की तस्वीर साफ़ न होने तक सुभासपा, अपना दल और निषाद समाज पार्टी जैसे छोटे दलों में अभी भी सस्पेंस बरकरार है। वहीं समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के बायोडाटा खंगालना शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में इस बार के चुनाव में बहुत कुछ बदलने वाला है। सबसे अहम् बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की चल रही चुनावी तैयारियों को लेकर है। सूत्रों की माने तो दोनों पार्टियां गठबंधन और बिना गठबंधन की स्थति को ध्यान में रखकर तैयारी कर रही हैं।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का यही गठबंधन होता है तो समाजवादी पार्टी कांग्रेस को कितनी सीटें देगी, इसका अभी खुलासा नहीं हुआ है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी लगातार अखिलेश यादव के संपर्क में बने हुए हैं। सूत्रों ने कहा कि फ़िलहाल दोनों पार्टियों के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है और गठबंधन को लेकर दोनों सकारात्मक दिख रहे हैं।

हालांकि सूत्रों ने यह भी कहा कि कांग्रेस के अंदर एक गुट यह भी चाहता है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस समाजवादी पार्टी या किसी अन्य दल के साथ गठबंधन न करके पूरी 403 सीटों पर चुनाव लड़े। हाल ही में कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी इसी तरह का एक बयान सामने आया है, जिसमे उन्होंने कहा कि कांग्रेस राज्य की सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ने के हिसाब से तैयारी कर रही है।

कांग्रेस को हल्के में लेना पड़ेगा भारी:

इस बार कांग्रेस के हालात 2022 के विधानसभा चुनाव से कहीं बेहतर हैं। भले ही उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन में ज़्यादा धार न हो लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी नेताओं के आत्म विश्वास में बढ़ोत्तरी हुई है। इसके अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी की बढ़ती आक्रामकता और लगातार दलित मुद्दों को उठाना, GEN-Z से संवाद और बीजेपी पर लगातार हमले इस बात का सबूत है कि इस बार कांग्रेस कुछ बेहतर करने जा रही है।

जानकारों की माने तो इस बार उत्तर प्रदेश में कांग्रेस एक नया एक्सपेरिमेंट करने जा रही है। यह एक्सपेरिमेंट दलित मुस्लिम और सवर्ण मतदाताओं के गठजोड़ को लेकर होगा। जानकारों के मुताबिक, अगर कांग्रेस यह समीकरण बनाने में सफल रहती है तो यूपी के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक बड़ी चुनौती बनकर उभरेगी और कांग्रेस को हल्के में लेना बहुत भारी सबित होगा।

वहीं इस पूरे मामले में सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अभिनाश पांडे को हटाकर राजेंद्र गौतम को प्रभारी बनाया जाना, एक इत्तेफाक नहीं है बल्कि कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है। दरअसल, कांग्रेस की नज़र बहुजन समाज पार्टी के टूटते वोट बैंक पर है। वही पिछले कुछ वर्षो में कांग्रेस देश के मुसलमानो को यह भरोसा दिलाने में सफल रही है कि यदि बीजेपी को पटकनी देनी है तो उसके लिए कांग्रेस को ताकतवर बनाना पड़ेगा।

हाल ही में बीजेपी के आंतरिक सर्वे में भी इस तरह का ज़िक्र है। मीडिया खबरों के मुताबिक, सर्वे रिपोर्ट में कांग्रेस उम्मीदवार वाली सीटों पर खासी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। यही कारण है कि बीजेपी के आंतरिक सर्वे में बृज प्रदेश की 167 सीटों में करीब 58 सिटिंग एमएलए का टिकट काटने की सलाह भी दी गई है।

अभी कई नेता कर रहे हैं इंतज़ार:

इस बीच खबरें कुछ इस तरह की भी हैं कि बहुजन समाज पार्टी और बीजेपी के कुछ नेता जल्द ही कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। बताया गया कि बहुजन समाज पार्टी के लिए ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले दो कोर्डिनेटर और पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के बैनर तले उम्मीदवार रहे पूर्वी उत्तर प्रदेश के 4 कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 2 पूर्व प्रत्याशी और बसपा नेता कांग्रेस में अपना सुरक्षित ठिकाना तलाश रहे हैं और वे कभी भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि अभी चुनावो में खासा समय है और चुनाव आने तक बहुत से समीरकरण बनेगे और बिगड़ेंगे, लेकिन इतना तय है कि इस बार कांग्रेस उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उम्मीदों से परे एक बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है।


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Raja Zaid

"राजा ज़ैद एक जाने-माने पत्रकार हैं। उन्हें देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ राजनीति और सामायिक विषयो की कवरेज का 15 वर्षो से अधिक का अनुभव है।