अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक के बाद एक शिकायत पर हाई कोर्ट ने लगाई फटकार
नई दिल्ली: कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC नेता अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बार-बार दर्ज होने वाले मुकदमों पर सख्त रुख अपनाया है, कोर्ट ने साफ लहजे में कहा कि ‘अब बहुत हो गया है’ और इस सिलसिले को रोकना होगा। अदालत ने चेतावनी भी दी कि अगर उनके खिलाफ इसी तरह लगातार शिकायतें और FIR आती रही, तो वह एक नया नियम लागू कर सकते है। इसके बाद पुलिस उनके खिलाफ कोई भी नया मामला तब तक दर्ज नहीं कर पाएगी, जब तक वह सीधे कोर्ट से इसकी मंजूरी न ले ले।
अंतरिम राहत और दंडात्मक कार्यवाई पर रोक
यह मामला तब सामने आया जब हाईकोर्ट को बताया गया कि पहले से मिली अंतरिम सुरक्षा के बावजूद सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ लगातार कई आपराधिक शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। यह सुनवाई क्लिनिकल प्रैक्टिस और नकली दवाओं से जुड़ी गड़बड़ियों की शिकायतों पर दर्ज एफआईआर से संबंधित याचिका पर हो रही थी।
अभिषेक बनर्जी की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन पेश हुए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिकायतों की प्रकृति पर असंतोष जताया और सवाल उठाया कि बिना किसी जांच के और बनर्जी की संलिप्तता साबित हुए बिना आरोपों को उनसे कैसे जोड़ा जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि उसने व्यक्तिगत रूप से तीन शिकायतें देखी हैं, जिनमें से किसी का भी याचिकाकर्ता से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस अपनी जांच जारी रख सकती है और आरोप पत्र दाखिल कर सकती है, लेकिन इस स्तर पर बनर्जी से हिरासत में पूछताछ करना सही नहीं है।
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राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल ने दलील दी कि मामला फर्जी दवाओं से जुड़ा है और शिकायतकर्ता ने सच सामने लाने वाले व्यक्ति के रूप में शिकायत की है। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि अगर शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी थी, तो उसने एक साल पहले शिकायत क्यों नहीं की।
कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ शिकायत करने वाला वही शख्स है, जो उनके सामने चुनाव लड़कर दो बार हार चूका है। वहीं, राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि भले ही उन्होंने खुद कुछ न किया हो, पर जांच में उनके नीचे काम करने वाले लोगों के जरिए उनका नाम सामने आ सकता है। हालांकि, कोर्ट ने अभी उनके खिलाफ किसी भी तरह की सख्त या दंडात्मक कार्यवाई करने से साफ मना कर दिया है और 30 नवंबर तक उन्हें राहत दे दी है।
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