FCRA बिल पर केसी वेणुगोपाल का बड़ा बयान: ‘बिना गहन चर्चा के JPC बेकार’
नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर एफसीआरए FCRA संशोधन बिल, 2026 की जांच कर रही जेपीसी JPC के कामकाज पर गहरी चिंता जताई है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट शेयर कर बताया कि यह एक बेहद संवेदनशील बिल है। वेणुगोपाल के अनुसार, इस नए कानून का देश के अल्पसंख्यकों और सिविल सोसाइटी संगठनों NGOs के संवैधानिक अधिकारों पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा, इसलिए इस विषय पर संसद में और जेपीसी के भीतर व्यापक बातचीत होनी बेहद जरूरी है।
गहन परामर्श के बिना जेपीसी बेकार
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि जेपीसी JPC का मुख्य उद्देश्य सभी पक्षों से बातचीत कर बिल की बारीकी से जांच करना था लेकिन इस प्रक्रिया को ठीक से नहीं अपनाया गया। उन्होंने लोकसभा स्पीकर से मांग की कि जेपीसी एनजीओ धार्मिक और चैरिटेबल संस्थाओं स्वैच्छिक संगठनों कानूनी विशेषज्ञों और राज्य सरकारों के सुझाव ले और बिल के हर प्रावधान पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरा समय दे।
12 अगस्त को विदेशी चंदा नियम FCRA संशोधन बिल को जांच के लिए 31 सदस्यों वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को सौंपा गया था, जिसे संसद के शीतकालीन सत्र से पहले अपनी रिपोर्ट देनी है।
विपक्षी दलों के नेता इस बिल की बारीकी से जांच करने और आम जनता व एनजीओ NGOs से राय लेने के लिए अतिरिक्त समय की मांग कर रहे हैं।
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इसी सिलसिले में विपक्ष के सदस्यों ने जेपीसी अध्यक्ष संजय जायसवाल को पत्र लिखकर 12 अक्टूबर को होने वाली अहम बैठक को कम से कम चार हफ्ते आगे टालने और जनता से सुझाव लेने की अंतिम तारीख को भी चार सप्ताह और बढ़ाने का अनुरोध किया है।
सुझाव के लिए सात दिन नाकाफी
डीएमके सांसद पी. विल्सन ने अलग से मांग की है कि समिति द्वारा स्टेकहोल्डर्स से आपत्तियां और सुझाव भी मांगे जाए। उनका तर्क है कि सात दिन का समय संगठनों और विशेषज्ञों के लिए विस्तृत सुझाव तैयार करने के लिए अपर्याप्त था। जेपीसी बिल की जांच के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ पहले ही चर्चा कर चुकी है।
अधिकारियों के अनुसार अभी 14,440 सक्रिय एफसीआरए खाते हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि ‘गहन परामर्श प्रक्रिया’ के बिना जेपीसी का कोई खास मकसद पूरा नहीं होगा और उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि संसद में बिल पर विचार करने से पहले इसकी व्यापक जांच सुनिश्चित की जाए।
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