महाभियोग की जंग के बीच राहुल गांधी की नई पोस्ट: चुनौतियों को दी खुली चुनौती
नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने देश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने ‘एक्स’ अकाउंट पर लिखा,”मुझे समुद्र में तब तैरना पसंद है, जब लहरें बहुत तेज हो, इससे यह सीखने को मिलता है कि भारी उथल-पुथल भी असल में शांति का ही एक दूसरा रूप है।”
राहुल गांधी का यह दार्शनिक बयान ठीक उस समय आया है, जब चुनाव आयोग के अंदरूनी मतभेदों की खबरें बाहर आने के बाद विपक्षी पार्टियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग पर अड़ी हुई है।
केरल कांग्रेस के खुलासे से बढ़ा विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई जब केरल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर यह दावा किया कि केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन के अनुसार, ज्ञानेश कुमार ने वर्ष 2016 में उन्हें भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने और मंत्री पद की पेशकश की थी।
इसी को लेकर राहुल गांधी ने तीखा हमला बोलते हुए पोस्ट किया, “पहले ज्ञानेश कुमार, जो उस समय एक सेवारत आईएएस अधिकारी थे, का इस्तेमाल बीजेपी के लिए भर्ती करने में किया गया।
फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बनाया और उन्हें भारत के चुनावों में मैच फिक्सिंग का जिम्मा सौंप दिया।”
कांग्रेस समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के कई दलों ने इस मुद्दे पर दिल्ली समेत देशभर में धरना-प्रदर्शन किया है।
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विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर काम कर रहा है और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नाम पर मतदाता सूची से सोची-समझती साजिश के तहत नाम काटे जा रहे हैं।
इन तमाम आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने पहले ही एक प्रेस नोट जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा था कि हाल के महीनों में देश भर में एसआईआर से जुड़े सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं।
चुनाव आयोग की सफाई के बाद बीजेपी ने विपक्ष पर अपना हमला और तेज कर दिया है। सत्ताधारी दल का कहना है कि जब आयोग के सारे फैसले कानूनी नियमों के तहत और सबकी सहमति से हुए है,तो फिर विपक्ष बेवजह एक अधिकारी के मतभेद की बात को बड़ा चढ़ाकर पेश कर रहा है।
भाजपा के मुताबिक, चुनाव प्रणाली पर इस तरह के झूठे आरोप लगाना कुछ और नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं का भरोसा तोड़ने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है।
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