चढ़ावा चोरी पर बोले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद- ‘चंपत राय को बचा रहे पीएम मोदी’
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर चंदा चोरी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने करीबी और उपयोगी चंपत राय को बचाने के लिए उनके झूठे इस्तीफे का माहौल बनवा रहे हैं
अयोध्या: गौ-रक्षा को लेकर देशव्यापी यात्रा पर निकले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद उत्तर प्रदेश के गोंडा पहुंचे, जहां उन्होंने राम मंदिर और चंदा विवाद से लेकर बाबा बागेश्वर के बयान को लेकर केंद्र व उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दान चोरी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को बचा रहे हैं।
उन्होंने दावों को खारिज करते हुए कहा कि चंपत राय ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि केवल जनता के बीच झूठ फैलाकर एक माहौल बनाया जा रहा है। चंपत राय आज भी पद पर बने हुए हैं और काम कर रहे हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने सवाल उठाया कि जब रिपोर्ट सार्वजनिक हो सकती है, तो चंपत राय का इस्तीफा सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? इसके पीछे का रहस्य यही है कि चंपत राय उन्हें बैठाने वालों के लिए बहुत उपयोगी हैं, इसलिए प्रधानमंत्री उनका लाभ लेते रहने के लिए उन्हें बचा रहे हैं।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बाबा बागेश्वर) द्वारा पर्ची न निकालने के सवाल पर शंकराचार्य ने उनके बयान की सराहना की।
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उन्होंने कहा कि बाबा बागेश्वर का वक्तव्य बहुत ईमानदार और नपा-तुला था, जिन्होंने एक वाक्य में सब कह दिया कि ‘अगर मैं पर्ची निकालूंगा तो मेरा भी रह पाना कठिन हो जाएगा’।
शंकराचार्य ने तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति मंच पर खुद को प्रधानमंत्री का छोटा भाई निरूपित करता है, जब उसके मन में भी ऐसा डर है, तो आम जनता की बात ही दूर है; यह शासन व्यवस्था बेहद खराब है।
वहीं, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा शंकराचार्य पर ‘भगवा चोला पहनकर राजनीति करने’ के लगाए गए आरोप पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि यह बयान उनके लिए नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि प्रदेश में गौ-हत्या वही करवा रहे हैं जो स्लॉटर हाउस से चंदा लेते हैं; कोई भी सच्चा संन्यासी या गेरुआधारी ऐसा नहीं कर सकता।
उन्होंने विरोधियों की तुलना ‘कालनेमि’ से करते हुए कहा कि वे अंदर से कुछ और तथा बाहर से कुछ और दिखाई देते हैं।
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