संगरूर रैली से पहले कांग्रेस में हलचल: क्या राहुल गांधी का ‘एकता मंत्र’ लाएगा रंग
नई दिल्ली: मालवा इलाके में आठ महीने के अंदर राहुल गांधी का यह दूसरा दौरा एक बड़ा सियासी कदम है। पहले बरनाला और अब संगरूर में हो रही इस जनसभा का मकसद बदल चुका है। पिछली बार जहाँ वह सिर्फ किसान-मजदूरों की बात करने आए थे, वहीं इस बार वह आने वाले विधानसभा चुनाव के प्रचार की शुरुआत करने पहुँच रहे हैं।
कांग्रेस द्वारा दोनों रैलियों के लिए पंजाब के मालवा क्षेत्र को चुनना उसकी एक खास चुनावी रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 69 सीटों वाले इस सबसे बड़े क्षेत्र में पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था और उसकी सीटें 2017 की 40 से घटकर महज दो रह गई थीं।
15 जिलों में फैले मालवा में कांग्रेस की इस करारी हार की मुख्य वजह अंदरूनी कलह, चरणजीत सिंह चन्नी और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच टकराव, गुटबाजी, मालवा से ताल्लुक रखने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का चुनाव से पहले पार्टी छोड़ना और इसी क्षेत्र के भगवंत मान को आम आदमी पार्टी द्वारा सीएम चेहरा घोषित करना रही।
अब कांग्रेस नेतृत्व यह अच्छी तरह समझता है कि मालवा से उठी सियासी लहर ही पूरे पंजाब के मिजाज को तय करती है, इसलिए बरनाला के बाद राहुल गांधी अब मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर से आप सरकार की घेराबंदी करने की तैयारी में हैं।
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इस रैली के जरिए राहुल गांधी नशे के कारोबार, भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, गैंगस्टरवाद और किसानों की समस्याओं जैसे मुद्दों को उठाकर चुनावी बिगुल फूकेंगे, जो कि नए प्रभारी सचिन पायलट और प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह के लिए एक बड़ी परीक्षा होने के साथ-साथ पिछले चार महीनों से गुटबाजी झेल रही पंजाब कांग्रेस को एक मंच पर लाने का प्रयास भी है।
नेताओं के आपसी मतभेद चाहे जो हों, पर चुनाव के लिए वे एक साथ मंच पर आ रहे हैं। अब पार्टी लीडरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस एकता को बनाए रखकर कांग्रेस की सरकार वापस लाने की है। बरनाला में राहुल गांधी ने सबको मिलकर चलने की कड़ी हिदायत दी थी, इसलिए उम्मीद है कि संगरूर रैली में सभी नेता पहले से ज्यादा एकजुट दिखाई देंगे।
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