जलस्रोतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बर्दाश्त नहीं करेंगे लापरवाही, राज्यों को निर्देश
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के जलस्रोतों (वेटलैंड्स) की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्य सरकारों को फटकार लगाई है। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि नियम बनने के 9 साल बाद भी नदियों, तालाबों और झीलों की जमीनी जांच और उनकी सीमाएं तय करने का काम पूरा नहीं हो सका है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने साफ कहा कि पीने का पानी लोगों के ‘जीवन के अधिकार’ से जुड़ा है, इसलिए अदालत इस लापरवाही पर मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकती। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को तुरंत मौके पर जाकर जलस्रोतों का निरीक्षण करने और उनकी सीमाएं तय करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
अभिषेक उपाध्याय की सुप्रीम कोर्ट में गुहार
सुप्रीम कोर्ट में पत्रकार अभिषेक उपाध्याय द्वारा एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें जांच एजेंसियों द्वारा व्यक्तिगत और डिजिटल डाटा के संग्रह पर संवैधानिक सुरक्षा व्यवस्था और स्पष्ट दिशा निर्देश तय करने की मांग की गई है।
याचिका में कहा गया है कि आज के डिजिटल दौर में मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, सोशल मीडिया और क्लाउड स्टोरेज में किसी व्यक्ति के निजी जीवन की संवेदनशील जानकारियां मौजूद होती हैं, इसलिए एजेंसियों की शक्तियों को नियंत्रित करना आवश्यक है।
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील शेखर नफड़े ने काम की जटिलता को देखते हुए 6 से 9 महीने का समय मांगा था, लेकिन अदालत ने प्रक्रिया पूरी करने के लिए 4 महीने का समय उचित मानते हुए 4 हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
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डेटा सुरक्षा पर वकील की दलील
इसमें निजी बातचीत, लोकेशन हिस्ट्री, पेशेवर बातचीत, गोपनीय जानकारी व अन्य लोगों से जुड़े विवरण शामिल हो सकते हैं। वकील अनूप प्रकाश अवस्थी के जरिये दाखिल इस याचिका में तर्क दिया गया है कि ऐसी जानकारी तक बिना किसी रोक-टोक या जरूरत से ज्यादा पहुंच से किसी अपराध की जांच के लिए आवश्यक जानकारी से कहीं अधिक डाटा सामने आ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई हाई-पावर जांच कमेटी (HPEC) आगामी 29 अक्टूबर को नई दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित शिक्षा सदन में एक अहम बैठक करने जा रही है। यह कमेटी जुलाई महीने में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा, पैलेट गन के कथित इस्तेमाल और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न के आरोपों की जांच करेगी।
आम नागरिक और इस हिंसा से प्रभावित लोग 29 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 3:00 बजे के बीच अपने पहचान पत्र के साथ कमेटी के सामने पेश होकर अपनी शिकायतें, सबूत या बयान दर्ज करा सकते हैं। पहले यह सुनवाई दो दिनों की होनी थी, लेकिन अब इसे केवल 29 अक्टूबर को एक ही दिन में पूरा किया जाएगा।
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