केजरीवाल की सीट पर वोटर लिस्ट विवाद: चुनाव अधिकारी ने दी सफाई
नई दिल्ली: विधानसभा क्षेत्र की नई वोटर लिस्ट पर उठे सवालों का चुनाव विभाग ने जवाब दिया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अरविंद केजरीवाल के 2025 के चुनाव में बहुत कम वोटों से हारने के बाद, चुनाव से पहले जोड़े गए करीब 40% लोगों के नाम नई ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए है।
इस पर सफाई देते हुए नई दिल्ली के चुनाव पंजीकरण अधिकारी ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा है कि वोटर लिस्ट को सुधारने का यह काम पूरी तरह साफ-सुथरे ढंग से और चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक ही किया जा रहा है। इसका मकसद केवल फर्जी या आयोग्य नामों को सूची से बाहर करना और सही वोटरों को जगह देना है।
चुनाव अधिकारी का स्पष्टीकरण
अधिकारी के अनुसार, 31 अगस्त 2026 को जारी की गई यह ड्राफ्ट मतदाता सूची घर-घर जाकर किए गए सत्यापन और 30 जून से 17 अगस्त के बीच जमा किए गए गणना प्रपत्रों के आधार पर तैयार की गई है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट सूची में किसी का नाम न होना उसकी अपात्रता का अंतिम निर्णय नहीं है। जिन पात्र नागरिकों के नाम किन्हीं कारणों से छूट गए हैं, वे आगामी 30 सितंबर तक फॉर्म-6 और जरूरी दस्तावेज जमा करके अपना दावा पेश कर सकते हैं।
विभिन्न मामलों का खुलासा करते हुए अधिकारी ने बताया कि ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन के छात्र गणना अवधि में शहर से बाहर थे, इसलिए उनके नाम एएसडी सूची में दर्ज किए गए।
सरोजिनी नगर के पिलांजी गांव के मकान नंबर-8 में कई मतदाता मौके पर नहीं मिले, जिन्हें बीएलओ की रिपोर्ट के आधार पर सूची से बाहर किया गया। वहीं, गिरीश चंद्र पाल का नाम एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही 20 मई 2026 को नियमानुसार हटा दिया गया था।
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पंचकुइयां रोड स्थित दरगाह सैयद हुसैन के निवासी जमशेद आलम के संबंध में बताया गया कि बीएलओ द्वारा प्रपत्र देने पर उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था और बिहार में दूसरा ईपिक होने की बात कही थी, जिसके बाद उनका नाम एएसडीडी सूची में दर्ज किया गया।
इसके अलावा, ईस्ट किदवई नगर के सरकारी आवासों में रहने वाले कई केंद्र सरकार के कर्मचारी तबादला होने या आवास छोड़ने के कारण नियमानुसार इस सूची में दर्ज किए गए हैं।
चुनाव अधिकारी ने मीडिया में चल रही खबरों को गलत बताते हुए कहा है कि सिर्फ अलग-अलग समय के आंकड़ों को देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि नाम गलत तरीके से काटे गए है। उन्होंने साफ किया कि हर नाम को हटाने से पहले जमीनी स्तर पर उसकी पूरी जांच की जाती है।
अधिकारी ने यह भी बताया कि जब यह नई लिस्ट (ASDD) तैयार हो रही थी, तब सरकारी कर्मचारियों (BLO) और सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों (BLA) की आपस में बैठकें हुई थी। उस समय किसी भी राजनीतिक दल ने इस लिस्ट को लेकर कोई शिकायत या आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।
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