क्यों हुआ एफिल टावर बंद? क्या है 100 हिंदू नेता और एक महिला कर्मचारी की स्टोरी
नई दिल्ली (इंटरनेशनल डेस्क): फ्रांस की राजधानी पेरिस का मशूहर एफिल टावर हाल ही में कुछ समय के लिए बंद हो गया, इसकी वजह यह थी कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों ने यूनियन के साथ मिलकर प्रशासन के खिलाफ हड़ताल और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
यह पूरा विवाद तब खड़ा हुआ जब 100 लोगों का एक हिंदू प्रतिनिधिमंडल एफिल टावर देखने पहुंचा, और उनके दौरे के दौरान प्रशासन ने वहां ड्यूटी पर तैनात महिला कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को लगा दिया। इस बात से नाराज महिला कर्मचारियों ने लिंग आधारित भेदभाव और कड़ा ऐतराज जताते हुए काम बंद कर दिया।
यूनियन की बैठक और मैनेजमेंट की प्रतिक्रिया
कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि डायने डावोइन ने पीड़ित महिलाओं और यूनियन सदस्यों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की। इसका उद्देश्य मैनेजमेंट से बातचीत करना है ताकि भविष्य में किसी भी महिला कर्मचारी को जेंडर के आधार पर ड्यूटी से न हटाया जाए। इस विरोध के चलते कर्मचारियों ने टावर को देरी से खोला और नोटिस बोर्ड लगाकर कुछ समय के लिए आवाजाही बंद रखी।
एफिल टावर के ऑपरेशन्स को मैनेज करने वाली कंपनी SETE के प्रेसिडेंट एरियल वेल ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाने की शर्त रखी थी, जिसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। यह कंपनी के सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा नहीं होने दी जाएगी।
यह प्रतिनिधिमंडल बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) से जुड़ा था, जिसके करीब 100 हिंदू नेता पेरिस में एक हिंदू मंदिर के उद्घाटन में शामिल होने गए थे। इस ग्रुप ने वीकेंड पर एफिल टावर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को नजरों से दूर रखने की मांग की थी।
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विवाद बढ़ने पर BAPS ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संख्या में पर्यटकों के आने पर होने वाली भीड़ को प्रबंधित करने के उद्देश्य से यह अनुरोध किया गया था और किसी को भी अंदर जाने से नहीं रोका गया था, फिर भी यदि इससे किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है।
इस मामले ने अब फ्रांस में एक बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने इस पूरे विवाद की जांच करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही CGT ट्रेड यूनियन और वहां की संसद की अध्यक्ष याएल ब्रॉन-पिवे सहित कई नेताओं और मंत्रियों ने इस कदम की जमकर बुराई की है।
इन सभी का साफ कहना है कि बाहर से आने वाले मेहमानों की खातिरदारी करना फ्रांस की परंपरा है, लेकिन किसी विदेशी मेहमान की ज़िद पूरी करने के लिए अपनी ही महिला कर्मचारियों के साथ ऐसा भेदभाव करना किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं किया जा सकता।
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