कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ा विवाद: जयराम रमेश ने मांगा चुनाव आयुक्त का इस्तीफा
नई दिल्ली: विशेष गहन पुनरीक्षण SIR विवाद को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफे की मांग अब और तेज हो गई है। हैदराबाद के नाल्सार NALSAR लॉ यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कड़ा रुख अपनाते हुए।
टिप्पणी की कि लाखों भारतीय नागरिकों को वोटिंग के अधिकार से वंचित करना पूरी तरह मनमाना और संविधान के खिलाफ है।
इस बयान के तुरतं बाद कबगरेस महासचिव जय राम रमेश ने तीखा हमला बोला और कहा सुप्रीम कोर्ट के जज की टिप्पणी ने चुनाव प्रमुख की कमियों को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
उन्हीने मांग की है कि अगर ज्ञानेश कुमार में थोड़ी सी भी इंसानियत ईमानदारी बची है तो उन्हें देश के प्रति जिम्मेदारी समझते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगें जयराम रमेश
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की है। जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की तीखी टिप्पणी के बाद उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रमुख का पद पर बने रहना देश के लोकतांत्रिक हितों के लिए हानिकारक है ।
रमेश के मुताबिक कोर्ट के बयान से साफ है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने काम से सीधे तौर पर संविधान की गरिमा का उल्लंघन किया है।
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अपनी पोस्ट में जयराम रमेश ने कहा ‘हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी में कल जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने बेबाकी से अपनी बात रखी और CEC की पोलपट्टी खोलकर रख दी।
अगर ज्ञानेश कुमार में जरा भी शर्म लिहाज है तो उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। G2 के गैर-कानूनी आदेशों को लागू करने की उनकी क्षमता ने उन्हें अब देश के लिए एक बोझ बना दिया है।
जस्टिस भुइयां को दिग्विजय की बधाई
दिग्विजय सिंह ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए नागरिकों के वोटिंग अधिकारों पर बयान देने के लिए जस्टिस उज्ज्वल भुइयां को बधाई दी । साथ ही उन्होंने मुख्य न्यायाधीश CJI से कड़े फैसले लेने की अपील करते हुए कहा कि वे अदालत की अवमानना के लिए जेल जाने को भी तैयार हैं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि 1972 से सार्वजनिक जीवन में रहने के दौरान उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा नागरिकों के अधिकारों का ऐसा उल्लंघन कभी नहीं देखा उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को शर्म करने और तुरंत इस्तीफा देने की नसीहत दी।
वहीं TMC संसद की राजयसभा सागरिका घोष ने जस्टिस उज्जवल भुइयां की टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि नागरिको को अधिकारो से वंचित करना मनमाना है उनके अनुसार यह प्रक्रिया असंवैधानिक है और इसे किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता।
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