एसआईआर पर फैसले को वापस ले चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप: जस्टिस गौड़ा ने उठाए बड़े सवाल
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस वी. गोपाल गौड़ा ने सर्वोच्च अदालत के मई 2026 के फैसले पर गंभीर सवाल उठाए हैं जिसमें चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को सही ठहराया गया था।
जस्टिस गौड़ा का सीधा आरोप है कि चुनाव आयोग ECI ने सुनवाई के दौरान अदालत के सामने गलत तथ्य पेश किए और उसे गुमराह कर एक तरह की धोखाधड़ी की, जिसके चलते यह फैसला आया।
उनका कहना है कि इस फैसले में साफ तौर पर गैर कानूनी और असंवैधानिक बातें दिखाई देती हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को खुद आगे आकर सुओ मोटो संज्ञान लेकर अपने इस फैसले को वापस लेना चाहिए।
पूर्व न्यायाधीश ने यह मांग भी की है कि कोर्ट को चुनाव आयोग के सारे रिकॉर्ड मंगाकर यह जांच करनी चाहिए कि क्या SIR कराने का यह फैसला वाकई सभी चुनाव आयुक्तों की मंजूरी और बहुमत से लिया गया था या नहीं।
जस्टिस गौड़ा का गंभीर आरोप
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश वी. गोपाल गौड़ा ने बेंगलुरु में एक प्रदर्शन के दौरान बयान देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण SIR की संवैधानिक वैधता को सही ठहराने वाला 27 मई का सुप्रीम कोर्ट का फैसला गैर-कानूनी और अलोकतांत्रिक है, इसलिए इसे तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग से सभी रिकॉर्ड तलब किए जाएं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एसआईआर लागू करने का फैसला पूर्ण आयोग की सहमति और बहुमत से लिया गया था या नहीं।
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न्यायमूर्ति गौड़ा के अनुसार, यदि यह प्रक्रिया नियमों के विरुद्ध पाई जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट के पास अपने पुराने फैसले की समीक्षा करने या उसे वापस लेने का गंभीर आधार बन जाएगा।
दूसरी ओर, यह टिप्पणी उस दिन सामने आई जब 42 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के एक अन्य समूह ने एसआईआर का समर्थन करते हुए इसे पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया बताया था।
जस्टिस भुइयां के बयान का समर्थन
सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश उज्जल भुइयां की हालिया टिप्पणी का समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति गौड़ा ने कहा कि मतदाताओं को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने के खिलाफ आवाज उठाकर उन्होंने कोई न्यायिक मर्यादा नहीं तोड़ी है।
न्यायमूर्ति भुइयां ने रविवार को कहा था कि लाखों नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
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